
हिन्दू शब्द के साथ जितनी भी भावनाएं और पद्धतियाँ, ऐतिहासिक तथ्य, सामाजिक आचार-विचार तथा वैज्ञानिक व आध्यात्मिक अन्वेषण जुड़े हैं, वेसभी हिन्दुत्व में समाहित हैं।हिन्दुत्व शब्द केवल मात्र हिन्दू जाति के कोरेधार्मिक और आध्यात्मिक इतिहास को ही अभिव्यक्त नहीं करता।हिन्दू जातिके लोग विभिन्न मत मतान्तरों का अनुसरण करते हैं। इन मत मतान्तरों वपंथों को सामूहिक रूप से हिन्दूमत अथवा हिन्दूवाद नाम दिया जा सकता है ।आज भ्रान्तिवश हिन्दुत्व व हिन्दूवाद को एक दूसरे के पर्यायवाची शब्दों के रूपमें प्रयोग किया जा रहा है। यह चेष्टा हिन्दुत्व शब्द का बहुत ही संकीर्ण प्रयोग है। वास्तव में हिंदुत्व को सबसेज्यादा चोट यहाँ कि राजनैतिक दलों के द्वारा पहुँचाया जा रहा है जिसमे विचारधारा कि लड़ाई लड़ने वालेकम्युनिस्ट व काग्रेस के बुद्धिजीवी ज्यादा रहे हैं जो धर्मनिर्पेक्षता के नाम पर तुष्टिकरड़ पर उतर गए हैं व हिन्दूमतों के साथ छेड़ छाड़ कर रहे हैं|मुसलमानों के जेहाद व ईसामसीह के अनुयाय्यियो के कारड़ धर्म का वास्तविकस्वरुप सम्प्रदायवाद का रूप ले रहा है, आज धर्म क्या है ? एक सार्वभौम प्रश्न बनकर खड़ा है.......

